Friday, May 15, 2009

आर्यभटीय की संक्षिप्त परन्तु उत्तम व्याख्या अपनी टीका में प्रस्तुत की

शंकरनारायण, उदय दिवाकर (१०७३ ई.), सूर्यदेव (११९१ ई.) ने भी प्रभाकर की टीका का उल्लेख किया है। सोमेच्च्वर ने अपनी टीका में श्लोकों की व्याख्या करते हुए, कई नए उदाहरण भी दिए हैं। आर्यभट के सिद्धान्तों की श्रेष्ठ व्याख्या सर्यदेव यज्व की टीका - आर्यभट प्रकाच्च अथवा आर्यभट प्रकाच्चिका में पाई जाती है। १५वीं शताब्दी के केरल के ज्योतिषाचार्य परमेच्च्वर ने सूर्यदेव की टीका का उपयोग करते हुए आर्यभटीय की संक्षिप्त परन्तु उत्तम व्याख्या अपनी टीका में प्रस्तुत की। नीलकंठ सोमयाजी (१५०० ई.) की टीका-महाकाव्य अपने ऐतिहासिक सन्दर्भों के साथ-साथ ज्योतिष में आद्यतन संच्चोधनों के लिए जानी जाती है। कर्नाटक के रघुनाथ राजा (१५९७ ई.), आन्ध्रप्रदेच्च के विरुपाक्ष के पुत्र माधव एवं भूतिविष्णु की टीकाएँ भी उल्लेखनीय हैं।

1 Comment:

अनुनाद सिंह said...

आपका ब्लाग हिन्दी के अन्य ब्लागों से सर्वथा भिन्न है। ऐसा लेखन जिसमें कुछ 'सूचना' हो, हिन्दी में कम ही हैं। ऐसे ही ब्लाग हिन्दी का नेट पर स्थान सुबिश्चित करने में सहायक होंगे।