Wednesday, May 6, 2009

भास्कर-प्रथम के पूर्व प्रभाकर ने आर्यभटीय पर टीका लिखी थी

आर्यभटीय की लोकप्रियता एवं सम्पूर्ण भारत में उसकी बौद्धिक स्वीकृति का प्रमाण उस पर लिखी गई टीकाओं से मिलता है। कुछ प्रमुख टीकाओं की चर्चा नीचे की जा रही है -आर्यभटीय की टीकाएँ आर्यभटीय पर लिखी टीकाओं में सर्वाधिक प्रचलित एवं प्रसिद्ध टीका भास्कर प्रथम की महाभास्करीय हैं जो ६२९ ई. में लिखी गई। शंकर नारायण (८६९ ई.) ने इसकी प्रच्चस्ति में कहा, ÷आर्यभट के बारे में सब कुछ जानने की इच्छा रखनेवाले को यह टीका पढ़ना चाहिए।÷ भास्कर ने अपनी टीका में कई स्थान पर आचार्य प्रभाकर को उद्धृत किया है। इससे प्रतीत होता है कि भास्कर-प्रथम के पूर्व प्रभाकर ने आर्यभटीय पर टीका लिखी थी - जो अब उपलब्ध नहीं है।

1 Comment:

Janta Ki Awaz said...

आर्य भट्ट के प्रत्येक सवाल का जवाब ब्रह्मगुप्त ने दिया है। राजस्थान के भीनमाल शहर जो कभी गुजरात की राजधानी था। ऐसे स्थान को ब्रह्मगुप्त ने अपनी कर्म भूमि के लिए चुना और गुरूत्वाकर्षण, भूजल-स्तर पर विशेष प्रयोग किये। आज हमार दुभाग्य है कि हमारा प्रशासन ब्रह्मगुप्त की प्रयोगशाला को समझ नहीं सका और उसमें शहर का कचरा डलाकर नष्ट कर दिया। अब हमारा एक छोटा-सा प्रयास है कि प्रशासन से उस कचरे को वहां से हटवाया जावे।