Friday, May 1, 2009

गीतिकापाद के १० श्लोक गीतिका छन्द में हैं

गीतिकापाद के १० श्लोक गीतिका छन्द में हैं, इसलिए इसे दच्चगीतिकापाद भी कहा जाता है। इसमें परिभाषाएँ दी गई हैं और ज्योतिषीय प्राचलों एवं ज्या सारणियों की चर्चा की गई है। इसमें काल की इकाइयों और ग्रहों की स्थितियों की विवेचना है। गणितपाद में अंकगणित एवं बीजगणित सम्बन्धी निष्कर्ष हैं। कालक्रियापाद में समय की विभिन्न इकाइयों एवं ग्रहों की स्थितियों का विवेचन है। गोलपाद में सूर्य, चन्द्रमा एवं अन्य ग्रहों की गति सम्बन्धी विच्च्लेषण है।

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