Saturday, April 25, 2009

आर्यभट की रचनाएँ


कहा जाता है कि आर्यभट ने -आर्यभटीयआर्यभट सिद्धान्त, औरसूर्य सिद्धान्त प्रकाच्चनाम से तीन ग्र्रन्थों की रचना की थी। इसके अतिरिक्त अनेकों श्लोक उनके नाम से प्रचलित हैं। पर उनकी एकमात्र उपलब्ध कृति आर्यभटीय है - जिसके कारण उनका नाम भारतीय ज्योतिष और गणित के इतिहास में अमर है। आर्यभटीय - एक भव्य और मनोरम ग्रन्थ है। यह प्रथम पौरुषेय ज्योतिष ग्रन्थ के रुप में भी जाना जाता है। इसमें कुल १२१ श्लोक (पद) हैं। आर्यभटीय अपनी संक्षिप्त, सटीक और सूत्रात्मक अभिव्यक्ति के लिए प्रसिद्ध है। यह चार अध्यायों में विभाजित है -

गीतिकापाद - १३ श्लोक

गणितपाद - ३३ श्लोक

कालक्रियापाद - २५ श्लोक

गोलपाद - ५० श्लोक

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