Wednesday, April 22, 2009

अल-बरुनी ने भी कुसुमपुर के आर्यभट का उल्लेख किया है।

यद्यपि आर्यभट ने अपने जन्मस्थान के बारे में कोई उल्लेख नहीं किया है, पर उन्होंने कुसुमपुर (पाटलिपुत्र या आधुनिक पटना) का उल्लेख करते हुए लिखा है -

आर्यभटस्त्विह निगदति कुसुमपुरेभ्यार्चित ज्ञानम्‌

(आर्यभट कुसुमपुर में अतिच्चयपूजित ज्ञान का वर्णन करता है)

अल-बरुनी ने भी कुसुमपुर के आर्यभट का उल्लेख किया है। इससे यह प्रतीत होता है कि आर्यभट कुसुमपुर में निवास करते थे। परमेच्च्वर (१४३१) ने 'कुसुमपुराख्येस्मिन्देच्चे' कहकर इसकी पुष्टि की है। भास्कर प्रथम और नीलकंठ के अनुसार आर्यभट अच्च्मक जनपदीय थे। नर्मदा और गोदावरी के मध्य के जनपद का अच्च्मक प्रदेच्च के रुप में उल्लेख-पाणिनि की अष्टाध्यायी, वाल्मीकि रामायण, महाभारत और वराहमिहिर की वृहत्‌संहिता में मिलता है। सम्भव है कि आर्यभट का जन्म दक्षिण भारत के अच्च्मक जनपद में हुआ हो और फिर वे कुसुमपुर (पाटलिपुत्र) में रहने लगे हों। अनेकविद्वानों का यह भी मानना है कि आर्यभट नालन्दा विच्च्वविद्यालय से कुलप (कुलपति) के रुप में सम्बद्ध थे।

0 Comments: