-आर्यभट ने अपने जन्म के समय के बारे में इंगित करते हुए लिखा है -
द्याष्टयब्दानांषष्टिर्यदा व्यतीतास्त्रयच्च्चयुगपादाः।
त्रयाधिका विंच्चतिरब्दास्तदेह मम जन्मनोतीताः॥
अर्थात् - साठ वर्षों की साठ अवधियाँ तथा युग के तीन पाद जब व्यतीत हो गए थे तब मेरे जन्म के पच्च्चात २३ वर्ष हो चुके थे। इसके अनुसार कलियुग के ३६०० वर्ष व्यतीत होने पर आर्यभट की आयु २३ वर्ष की थी। भारतीय ज्योतिषियों के अनुसार शककाल का प्रारम्भ ३१७९ कलि से होता है। इस प्रकार - ४२१ शक अर्थात् ४९९ ई। में आर्यभट की आयु २३ वर्ष की थी। अतः उनका जन्म ४७६ ई। में हुआ था।
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